"साइकोलॉजी के अनुसार"

हर व्यक्ति अलग अलग समय में अलग अलग बर्ताव करता है, वह किस समय कैसा बर्ताव करेगा उसे पहले नहीं जाना जा सकता है।

"साइकोलॉजी के अनुसार"

सृष्टि के आरंभ से लेकर अब तक दो व्यक्ति सामान पैदा ही नहीं हुए, उनका आचरण उनकी जीवात्मा पर निर्भर करता है।

"साइकोलॉजी के अनुसार"

कभी कभी मनुष्य स्वयं ही अपने कार्यो पर चकित हो जाता है की यह कार्य मेने कैसे किया जो मेरे वश में नहीं था। 

"साइकोलॉजी के अनुसार"

संसार में हर व्यक्ति विशेष है, अलग है, मानवीय रूप में भिन्न है, उसके जैसा कोई दूसरा व्यक्ति पैदा ही नहीं हुआ। 

"साइकोलॉजी के अनुसार"

एक ही वातावरण में पलकर भी व्यक्ति में जो भिन्नता जो अलगाव अपने आसपास के लोगो के विपरीत होता है उसका एकमात्र कारण पूर्व जन्म के संस्कार ही होता है। 

"साइकोलॉजी के अनुसार"

हर व्यक्ति अपने ही जैसा पैदा होता है इसलिए सभी व्यक्ति भिन्न भिन्न होते है, वह अपनी कुंडली स्वयं बनाते है। उनका जीवन भी वो स्वयं गढ़ते है। 

"साइकोलॉजी के अनुसार"

किसी ज्योतिषी की कुंडली से उनका जीवन नहीं चलता है। बस कुंडली भविष्य की शंका और आशंका को बता सकती है। 

"साइकोलॉजी के अनुसार"

एक ही व्यक्ति बार-बार अलग-अलग समय और स्थान पर जन्म लेता रहता है, जिससे उसका विकाश हो होता है। 

"साइकोलॉजी के अनुसार"

किन्तु उसका मौलिक स्वरुप वैसा ही बना रहता है बार-बार अपना स्वरुप बदल लेते रहने से उसकी जीवात्मा का विकाश नहीं हो सकता। 

"साइकोलॉजी के अनुसार"

हर व्यक्ति अपना भविष्य स्वयं बनाता है कोई और उसकी मौलिक स्वरुप में परवर्तन नहीं कर सकता एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति की नक़ल लंबे समय तक नहीं कर सकता। 

"साइकोलॉजी के अनुसार"

आप जितना ज्यादा साइकोलॉजी जानते है आपके सक्सेस होने का चांस 70% बढ़ जाता है जिससे आप अपने मनपसंद कामो को जल्दी पूरा कर सकते है।